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बारिश का मौसम और तन्हाई का आलम, 26 साल पुरानी वो गजल, जो आज भी खामोश आशिकों का दर्द करती है बयां, गुलाम अली ने गाकर किया अमर

बारिश की शाम, तन्हाई का साथ और गुलाम अली की आवाज में यह गजल आज भी टूटे दिलों की कहानी बयां करती है. 26 साल बाद भी 'हम को किसके गम ने मारा' उन लोगों की पहली पसंद बनी हुई है, जो अधूरी मोहब्बत और बिछड़ने के दर्द को महसूस कर चुके हैं.
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