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INDIA
बदलते चेहरे, ठहरती यादों का टाइम ट्रैवल… चांदनी चौक में गुजरे कल की दस्तक

बरसों बाद जब हम किसी पुरानी जगह लौटते हैं, तो हमें किसकी कमी ज्यादा महसूस होती है? उन गलियों की, जो बदल गईं, उन अपनों की, जो नहीं रहे, या अपने ही उस पुराने रूप की, जो कभी उन्हीं गलियों में जीता था?
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